WHAT IS SOFTWARE ENGINEERING ?
Software Engineering का meaning एक ऐसे Engineering से है जिसमे computer system और किसी दूसरे electronic device के लिए Software का निर्माण (Construction ) किया जाता है |
⇒Software Engineer Programming और designing करके इन software और Application का निर्माण करते है |
CHARACTERISTICS OF SOFTWARE:-
➤ ROBUSTNESS:- Software में Robustness होनी चाहिए जिससे की Software में Defects और Failure को डिफेक्ट किया जा सके |
➤ SECURITY:- Software में security बेहतर होनी चाहिए जिससे की Software पूरी तरह safe बना रहे और वह Threats से Safe रहे |
➤ RELIABILITY:- Software reliable होना चाहिए यानि इसमें कोई Defects नहीं होने चाहिए |
➤ FLEXIBILITY:- Software Flexible होना चाहिए यानि अगर Software में कुछ changing करने है तो वह आसानी से किये जा सके |
➤TESTABILITY:- Software की Testing आसानी से की जा सके |
➤PLATFORM INDEPENDENT:- Software Platform Independent होना चाहिए यानि वह किसी भी
System में Run हो सके |
WHAT IS WATERFALL MODEL ?
Software Engineering के लिए Waterfall Model ( SDLC ) Software Development Life Cycle का एक Famous और अच्छा Version है | Waterfall Model Linear और Sequential Model है | इसका Meaning यह है की एक Development Phase तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक की उसका पिछ्ला वाला Phase पूरा नहीं हो जाता है |
हम Waterfall Model में Phases को overlap नहीं कर सकते है |
"हम Waterfall को निम्न तरीके से Imagine कर सकते है |
एक बार जब पानी चट्टान के किनारे से प्रवाहित होने लगता है और पहाड़ के निचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नहीं जा सकता है |
इसी तरह Waterfall Model भी काम करता है एक बार Development का एक Phase पूरा हो जाता है तो हम अगले Phase में चले जाते है लेकिन वापस पिछले Phase में नहीं जा सकते है |
➤ Waterfall में एक Phase का Output दूसरे Phase के लिए Input की तरह काम करता है |
Waterfall Model में पांच Phase होता है :-
1. Requirements Phase
2. Design
3. Implementation
4. Verification
5. Maintenance
1. Requirement Phase:- Requirement Phase Waterfall Model का सबसे पहला Phase है इस Phase में System की Requirements को store और Documended किया जाता है | यह Phase बहुत Crucial होता है क्यौकी इसी Phase पर दूसरे Phase Depend होता है |
2. Design Phase:- Design Phase इस बात पर Depend करता है की सॉफ्टवेयर का निर्माण किस तरह होगा | Design Phase का main काम Software System का Blueprient तैयार करना है जिससे की आने वाले Phase पर किसी तरह की कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े और Requirement Phase में जो भी Requirements है उनका Solution निकाल लिया जाए |
3. Implementation Phase:-इस phase में Hardware ,Software और Application Program को Install किया जाता है | और Data Base Design को Implement किया जाता है | इससे पहले की Database डिज़ाइन को Implement किया जाए ,Software को Testing Coding और Debugging Process से होकर गुजरना पड़ता है | Waterfall में यह सबसे लम्बे time तक चलने वाला Phase है |
4 . Verification Phase:- इस Phase में Software को verify किया जाता है | और यह Evaluate किया जाता है की हमने सही Product बनाया है | इस Phase में अलग अलग तरह से Testing की जाती है और Software के हर Area में CHECK किया जाता है |
➤ Verification का एक Advantage यह है की इससे Software के Fail होने का risk कम हो जाती है |
5 . Maintenance Phase :- यह Waterfall का सबसे Last Phase है | जब System बन के तैयार हो जाता है और User उसका इस्तमाल करना शुरू कर देते हैं | तब जो Problems उसमे आती है उनको Time -to time Solve करना पड़ता है तैयार Software को Time के according उसका ख्याल रखना और उसे maintain रखना ही Maintenance कहलाता है | SDLC में तीन तरह के Maintenance होते है :-
1. Corrective Maintenance
2. Adaptive Maintenance
3. Perfective Maintenance .
Software Engineering का meaning एक ऐसे Engineering से है जिसमे computer system और किसी दूसरे electronic device के लिए Software का निर्माण (Construction ) किया जाता है |
⇒Software Engineer Programming और designing करके इन software और Application का निर्माण करते है |
CHARACTERISTICS OF SOFTWARE:-
➤ ROBUSTNESS:- Software में Robustness होनी चाहिए जिससे की Software में Defects और Failure को डिफेक्ट किया जा सके |
➤ SECURITY:- Software में security बेहतर होनी चाहिए जिससे की Software पूरी तरह safe बना रहे और वह Threats से Safe रहे |
➤ RELIABILITY:- Software reliable होना चाहिए यानि इसमें कोई Defects नहीं होने चाहिए |
➤ FLEXIBILITY:- Software Flexible होना चाहिए यानि अगर Software में कुछ changing करने है तो वह आसानी से किये जा सके |
➤TESTABILITY:- Software की Testing आसानी से की जा सके |
➤PLATFORM INDEPENDENT:- Software Platform Independent होना चाहिए यानि वह किसी भी
System में Run हो सके |
WHAT IS WATERFALL MODEL ?
Software Engineering के लिए Waterfall Model ( SDLC ) Software Development Life Cycle का एक Famous और अच्छा Version है | Waterfall Model Linear और Sequential Model है | इसका Meaning यह है की एक Development Phase तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक की उसका पिछ्ला वाला Phase पूरा नहीं हो जाता है |
हम Waterfall Model में Phases को overlap नहीं कर सकते है |
"हम Waterfall को निम्न तरीके से Imagine कर सकते है |
एक बार जब पानी चट्टान के किनारे से प्रवाहित होने लगता है और पहाड़ के निचे की ओर गिरने लगता है और यह पानी ऊपर की ओर वापस नहीं जा सकता है |
इसी तरह Waterfall Model भी काम करता है एक बार Development का एक Phase पूरा हो जाता है तो हम अगले Phase में चले जाते है लेकिन वापस पिछले Phase में नहीं जा सकते है |
➤ Waterfall में एक Phase का Output दूसरे Phase के लिए Input की तरह काम करता है |
Waterfall Model में पांच Phase होता है :-
1. Requirements Phase
2. Design
3. Implementation
4. Verification
5. Maintenance
1. Requirement Phase:- Requirement Phase Waterfall Model का सबसे पहला Phase है इस Phase में System की Requirements को store और Documended किया जाता है | यह Phase बहुत Crucial होता है क्यौकी इसी Phase पर दूसरे Phase Depend होता है |
2. Design Phase:- Design Phase इस बात पर Depend करता है की सॉफ्टवेयर का निर्माण किस तरह होगा | Design Phase का main काम Software System का Blueprient तैयार करना है जिससे की आने वाले Phase पर किसी तरह की कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े और Requirement Phase में जो भी Requirements है उनका Solution निकाल लिया जाए |
3. Implementation Phase:-इस phase में Hardware ,Software और Application Program को Install किया जाता है | और Data Base Design को Implement किया जाता है | इससे पहले की Database डिज़ाइन को Implement किया जाए ,Software को Testing Coding और Debugging Process से होकर गुजरना पड़ता है | Waterfall में यह सबसे लम्बे time तक चलने वाला Phase है |
4 . Verification Phase:- इस Phase में Software को verify किया जाता है | और यह Evaluate किया जाता है की हमने सही Product बनाया है | इस Phase में अलग अलग तरह से Testing की जाती है और Software के हर Area में CHECK किया जाता है |
➤ Verification का एक Advantage यह है की इससे Software के Fail होने का risk कम हो जाती है |
5 . Maintenance Phase :- यह Waterfall का सबसे Last Phase है | जब System बन के तैयार हो जाता है और User उसका इस्तमाल करना शुरू कर देते हैं | तब जो Problems उसमे आती है उनको Time -to time Solve करना पड़ता है तैयार Software को Time के according उसका ख्याल रखना और उसे maintain रखना ही Maintenance कहलाता है | SDLC में तीन तरह के Maintenance होते है :-
1. Corrective Maintenance
2. Adaptive Maintenance
3. Perfective Maintenance .
So nice
ReplyDelete